निरीक्षण से पहले सब कुछ साफ! ”— 48 दिनों की देरी, साक्ष्य गायब, जिम्मेदार बेनकाब उत्तराखण्ड में अवैध खनन का मामला अब केवल नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि सुनियोजित प्रशासनिक संरक्षण की ओर इशारा कर रहा है। शिकायतों के 48 दिन बाद हुआ निरीक्षण — और तब तक खनन जारी, नदी में मलबा, साक्ष्य मिटाए जाने की पूरी आशंका — यह सब किसी “संयोग” से ज्यादा, मिलीभगत की कहानी कहता है।
टाइमलाइन जो साजिश की ओर इशारा करती है
– 02 .12.2025 – RTI
– 08.12.2025 / 16.12.2025 / 13.01.2026 / 22.01.2026 – व्हाट्सएप / कॉल शिकायतें
– 01.01.2026 / 19.01.2026 – लिखित शिकायतें
– 29.01.2026 – निरीक्षण
इस अंतराल में खनन चलता रहा — और साक्ष्य मिटते रहे।

निरीक्षण से पहले क्या-क्या “हटा” दिया गया?
सूत्रों के मुताबिक, निरीक्षण से ठीक पहले :
– नदी किनारे डाली गई लाखों टन मिट्टी को समतल/स्थानांतरित किया गया
– खनन पिट्स के किनारे बदले गए, माप छिपाई गई
– मशीनरी को अस्थायी रूप से हटाया / ढका गया
– सवाल उठता है—अगर सब वैध था, तो यह “तैयारी” क्यों?

रिस्पना नदी : अतिक्रमण की प्रयोगशाला
– खनन से निकली मिट्टी को रिस्पना नदी के 200 मीटर दायरे में डालकर:
– प्राकृतिक प्रवाह बाधित
– बाढ़/जलभराव का जोखिम
– नदी तटों पर स्थायी अतिक्रमण
पर्यावरणीय मानकों के अनुसार यह सीधा अपराध है—फिर भी रिपोर्ट में एक शब्द नहीं।

रिपोर्ट के विरोधाभास : जो लिखा है, जो किया गया
दस्तावेज़ बताते हैं : 1968 घन मीटर ( 5038 मीट्रिक टन ) अवैध खनन स्वीकार
फिर भी:
– FIR नहीं
– मशीनरी जब्ती नहीं
– अनुमति निरस्तीकरण नहीं

केवल “तीन गुना रॉयल्टी”—क्या अपराध की कीमत तय कर दी गई?
कानूनी जानकारों के अनुसार यह तरीका Supreme Court of India ( Deepak Kumar केस ) और National Green Tribunal के आदेशों के विपरीत है।
पर्यावरणीय अपराध पर संगठित चुप्पी
– रिपोर्ट में गायब:
– भू-स्खलन/धंसाव जोखिम
– जलस्रोत क्षति
– आबादी पर प्रभाव
– EIA/EMP
– NGT अनुपालन

विशेषज्ञ मानते हैं — यह चुप्पी स्वयं अपराध में सहभागिता है।
– MDDA की आड़ — कानून से ऊपर?
– कानूनी स्थिति स्पष्ट है:
– MDDA की स्वीकृति खनन लाइसेंस नहीं
– यह खनन / पर्यावरण कानूनों को अधिलिखित नहीं कर सकती
फिर भी इसे ढाल बनाकर खनन — कानून की गलत व्याख्या और अदालत को गुमराह करने जैसा।

अब जवाब चाहिए — नाम और कार्रवाई
– किस अधिकारी ने देरी की जिम्मेदारी ली?
– किसने FIR रोकी?
– किसने मशीनरी जब्ती से हाथ खींचा?
– यदि जवाब नहीं मिले, तो मामला हाईकोर्ट, NGT, लोकायुक्त और विजिलेंस तक जाएगा।
परम सत्य समाचार पोर्टल
डिजिटल ट्रेल, निरीक्षण नोट्स, फोटो / वीडियो और GPS संकेत — सब पार्ट–3 में सार्वजनिक करेगा।
— जारी रहेगा ( एक्सपोज़े पार्ट–3 जल्द आएगा )
