जम्मू-कश्मीर की नगरोटा विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव 11 नवंबर को होना है. इस सीट पर 10 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. सभी उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है. राजनीतिक दल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.
नगरोटा विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग अधिकारी को कुल 13 नामांकन प्राप्त हुए, जिनमें से जांच के दौरान दो निर्दलीय उम्मीदवारों नजाकत अली खटाना और हरबंस लाल भगत के नामांकन पत्र खारिज हो गए. जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार देव्यानी सिंह राणा का एक डुप्लीकेट नामांकन पत्र भी खारिज कर दिया गया, जबकि उनका मूल नामांकन पत्र स्वीकार कर लिया गया.
अब, अगर शुक्रवार शाम तक कोई भी उम्मीदवार अपना नामांकन वापस नहीं लेता है, तो कुल 10 उम्मीदवार इस हाई प्रोफाइल सीट पर चुनाव लड़ेंगे. नगरोटा से भाजपा उम्मीदवार देवेंद्र सिंह राणा ने 2024 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी, लेकिन 31 अक्टूबर 2024 को उनके निधन के बाद यह सीट खाली हो गई.
भाजपा ने दिवंगत विधायक राणा की 30 वर्षीय बेटी देव्यानी सिंह राणा को उम्मीदवार बनाया है, जो पहली बार चुनावी मैदान में उतरी हैं. देव्यानी ने कई बार कहा है कि नगरोटा के लोगों के साथ खड़े होना उनके पिता की अंतिम इच्छा थी, जिसके कारण वह सक्रिय राजनीति में उतरीं.
अपने पिता की विरासत, पार्टी के समर्थन और भावनात्मक दृष्टिकोण के कारण इस सीट पर देव्यानी सिंह राणा की स्थिति मजबूत दिख रही है, लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस की शमीम बेगम से कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है. शमीम बेगम नगरोटा विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले क्षेत्र डंसल से जिला विकास पार्षद (डीडीसी) सदस्य हैं. इसके अलावा नेशनल पैंथर्स पार्टी (इंडिया) के उम्मीदवार हर्ष देव सिंह भी चुनौती पेश कर रहे हैं, जो पूर्व मंत्री हैं और भाजपा और उसकी नीतियों के आलोचक हैं.
आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी इस सीट से अपने उम्मीदवार जोगिंदर सिंह को मैदान में उतारा है, लेकिन पार्टी की इस क्षेत्र में ज्यादा उपस्थिति नहीं दिख रही है. साथ ही AAP के प्रदेश संयोजक मेहराज मलिक पार्टी उम्मीदवार के लिए प्रचार नहीं कर पाएंगे, क्योंकि वह अभी भी सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत जेल में हैं, इसलिए AAP की तरफ से इस सीट पर कोई प्रभाव डालने की संभावना कम हो गई है.
